समिक्षा -कहानी संग्रह -रिश्ते





कहानी संग्रह -रिश्ते 
समिक्षा- साबिर खान पठान 
लेखक -मनमोहन भाटिया 
प्रकाशन -शोपिजन पब्लिकेशन हाऊस 
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साबिर खान की नजर से


मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ, मुझे श्री मन मोहन भाटिया जी के कहानी संग्रह 'रिश्ते' पर अपने विचार प्रकट करने का सुअवसर मिला। संग्रह की दस कहानियों का आधार रिश्ता है। पति-पत्नी, पिता-पुत्री, परिवार में भाइयों के रिश्ते के साथ पड़ोसी के रिश्ते पर लेखक की कलम ने व्यवहारिक पहलुओं को दर्शाया है।

पहली कहानी है 'प्रेम सदा के लिए'। कहानी बहुत ही सरल भाषा में मानव मन की गहराई में उतर जाती है। रमन और रुचिका जो अब पति-पत्नी है, अपने बीते हुए कल के रेशमी लम्हों को याद कर के मिलन का वह अविस्मरणीय दौर एक बार फिर से जीते हैं। जिंदगी गुजरने के बावजूद ह्रदय से जुड़े रिश्ते हमेशा हरे भरे रहते हैं यह बात कहानी में बेहतरीन ढंग से मनमोहन जी ने कही है। 

संग्रह की दूसरी कहानी है 'मूड' जिसमें अभिषेक और संदीप को क्रिकेट मैच देखने के लिए अपनी बीवियों की नाराजगी तक सहनी पडती है और रिश्ते को संभालने के लिए दोनों समझदारी भरा फैसला लेते हैं। 

'रिश्ते' नाम की कहानी दिल को छू गई क्योंकि इस कहानी में सिर्फ इंसानों से नहीं बल्कि वस्तुओं से भी भावनात्मक लगाव हो जाता है। इस बात का मन मोहन सर हमें बखूबी अहसास कराते हैं।

अगली कहानी 'गुस्सा' मन पर अपनी छाप छोड़ने में सफल होती है। रिया अपने पति की नौकरी से तंग आकर गुस्से में घर छोड़ देती है। लाख कोशिशों के बाद भी वह रेलवे स्टेशन से घर वापस आना नहीं चाहती लेकिन एक बूढ़े स्टेशन मास्टर की बात सुनकर वह पिघल जाती है। क्योंकि स्टेशन मास्टर में उसे वो रिश्ता नजर आता है जिसने हमेशा उसके वजूद की रक्षा की थी। 

सच पूछो तो कहानी 'दिल' को पढ़कर मेरी आँखें नम हो गई। काफी देर तक पिता के किरदार में रहे ओम चड्ढा के बारे में सोचता रहा, जो लव मैरिज करने वाली अपनी बेटी से नफरत करने लगा था। लेकिन जिंदगी की एक चोट ने ओम चड्ढा को एक नई दृष्टि प्रदान की। उनके पश्चाताप के आँसुओं की पुकार कुदरत ने सुन ली। रूह में उतर जाने वाली बेहतरीन कहानी 'दिल' है।

'बीस साल बाद में' दांपत्य जीवन में विश्वास की अहमियत को अच्छे ढंग से समझाया गया है। पति पत्नी दोनों में से जब भी कोई एक भी दूसरे के भरोसे को तोड़ता है तब रिश्ते की जड़ें खोखली हो जाती है।

अगली कहानी 'रानी' में सर ने वैवाहिक जीवन में पनपते प्रेम को सर्वोपरि बताया है यहाँ तक की पत्नी का प्रेम प्रेमिका को भी भुला देता है। यही सच्चाई है। 

'शोक सभा' में पैसे वाले कुछ लोग मौत को भी पार्टी की तरह एंजॉय करते हैं और दुखी होने का दिखावा करते हैं, ऐसे ही परिवार से लेखक हमें रूबरू कराते हैं।

कहानी लोफर और पागल में भी लेखक ने ऐसा जादू चलाया है कि मन पर छाप छोड़ने में सफल रहती हैं। सर का बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे कहानी संग्रह रिश्ते से मुझे साक्षात्कार कराया। दिल की गहराइयों में उतर जाने वाली कहानियाँ मन को लुभा गई। हर एक कहानी को पढ़ते हुए कभी होंठों पर हल्की सी मुस्कान दौड़ गई तो कभी आँखें झार झार हो गई। अब तो मेरा कहानी संग्रह 'रिश्ते' से जैसे एक अटूट रिश्ता सा बन गया है।


साबिर खान (गुजराती और हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध हॉरर स्टोरी लेखक)

सूरत (गुजरात)

दिनांक : 2 जून 2022

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