Vo kon thi -1
(अपने अंदाज को बरकरार रखते हुये एक और कहानी लेकर हाजिर हुं )
१
१
मकान हवा उजास वाला और काफी बडा है जिजु..!
निगाहने सारे कमरे का मुआयना करके अरमान के चेहरे पर उभर आए विचित्र भावों को पढ़ने की कोशिश करते हुए कहा
वैसे आप और जीजी को रहना है !
पसंद नहीं है तो दूसरा ढूंढ लेंगे तब तक आप मेरे घर में रह जाओ!
फ्लैट के 3 बड़े बड़े कमरे और किचन को देखने के बाद अरमान को जो विचित्र एहसास हुए उसको वह जाहिर कर के अपनी पत्नी नाज को परेशान करना नहीं चाहता था!
मन के विचारों पर कंट्रोल करते हुए तेजी से उसने निगाह से कह दिया!
फिलहाल तो निगाह हम इसी मकान में रह लेंगे..!
यस जीजी.. घर इतना भी बुरा नहीं है..! मेरे लिए सबसे फायदेमंद तो यही बात है कि जीजा और तुम दोनों मेरे घर के बिल्कुल सामने हो..!
और फिर तेरे इर्द-गिर्द ही कोई बड़ा मकान होगा तो बाद में देख लेंगे.!
ठीक है.. साफ सफाई करवा कर अपना सामान अंदर रखवा देते हैं..!
चलो अब तुम दोनों मेरे घर पर तब तक वह झाड़ू पोछा वाली भी आ जाएगी साफ सफाई उससे करवा देती हुं !
पंजाबी सलवार कुर्ते में अपने गोरे बदन को ढके हुए निगाह के मखमली श्वेत चेहरे पर फूलों सी मुस्कान छा गई!
अरमान ने आंखो से गर्भित इशारा किया!
तब नाज थोड़ी कसमसाई उसकी चेहरे पर सख्ती थी! उस नकली रोष में भी मोहब्बत की झलक रही थी!
काफी मेल था दोनों का आपस में!!
कभी कोई अनबन नहीं!
शादी के बाद साथ रहते हुए 5 साल गुजर गए थे! अब चार साल की एक प्यारी बच्ची थी!
अरमान एक अच्छा मोटर मैकेनिक था!
अपने छोटे से गांव में काम बहुत कम मिल रहा था! उस वजह से वह परेशान रहता था!
आर्थिक विडंबना की वजह से नाज को धरणी की स्वर्ग से सुंदर काफी जगहों पर घुमाने की उसकी मंशा अधूरी ही रह जाती थी!
जब नाजने अरमान की चिंताओं का जिक्र निगाह से किया तो उसने मशवरा देते हुए कहा था कि अपने मियां को लेकर तू जल्द से जल्द मेरे पास आजा! राजस्थान का पाली शहर बहुत बड़ा है!
उसका काम यहां कभी रुकेगा नहीं!
निगाह की बातों पर गौर करके
नाज ने पाली जाने के लिए अरमान को मना लिया!
और आज वो दोनो पाली मे थे!
अपनी साली के घर मे खाना हुवा तब तक ईत्मिनान से मजदूरो के पास घर की सफाई करवा के सामान भीतर रखवा दिया..!
आज दुसरे शहर मे उन्होने अपनी जिंदगी की कश्ती आगे बढाई!
छोटे छोटे तीन कमरे थे!
हर एक कमरे में खिडकिया थी जिस पर परदे लगे थे..!
मध्यस्थ खँड को बेडरुम के लिये दोनो ने चुना था!
फस्ट कमरा महेमानो के लिए मुकर्रर कर दिया और लास्ट कमरा डायनिंग होल धोषित किया..!
हदिस अपनी मा को चिपक कर लेटी थी!
अरमान अपनी साली और साढु के पास गप्पे लडा रहा था!
नाज खाना तैयार करके अरमान का वेईट कर रही थी!
काफी देर हो गई थी !
नये अंजाने शहर मे खुद को अकेली छोड कर अरमान का बाहर रहना उसके मन को नही भाया! वो काफी गुस्सा थी!
उसका गुस्सा अब ज्वाला मुखी बनकर अरमान पर टूटने वाला था!
तकरीबन साडे ग्यारा के करिब बिजली चली गई!
नाज काफी डर रही थी!
वह सूनमून होकर बेड मे लेट गई!
आंखे बंद करके उपर शॉल ओढली थी उसने!
की तब उसे कदमो की आहट सूनाई दी!
वो सो ने का ढोंग कर के पडी रही..!
अरमान ने अपने फ्लेट का गेट खोलकर भीतर एन्ट्री की अंधेरा गहेरा था..!
सामने किचन नजर आ रहा था..! फिर तीन कमरे थे!
किचन मे उसने एक परछाई देखी!
जो उसके पास होकर गुजरी.. !
अरमान को गुस्सा आया !
"बच्ची यहां गुम रही है और उसकी मा बिंदास्त होकर सो गई होगी..!
वो लडकी की परछाई अचानक उसकी आंखो से ओझल हो गई!
अरमान अंधेरे मे मोबाईल की टोर्च निकाल कर दरवाजे की और घुरता रहा!
दरवाजा बंद कर के फिर वो अपने बेडरुम मे आया!
मोबाईल टोर्च का फोक्स बेड पर डाला..!
उसकी मा से लिपट कर वो बच्ची सोई हुई थी!
अरमान के सर से काफी बोज हल्का हो गया!
पर दिमाग अभी भी गुमराह था!
किसकी परछाई थी? वह गुडिया आखिर कौन थी?
जब ईधर चूपचाप नाज को जगाकर दोनो ने खाना खाया !
उस वक्त निगाह के मकान की सिढिंया वो छोटी सी बच्ची रात का अंघेरा चीरते हुई चढ रही थी!
जिसकी परछाई किसी को नजर आने से रही!
(क्रमश:)
निगाहने सारे कमरे का मुआयना करके अरमान के चेहरे पर उभर आए विचित्र भावों को पढ़ने की कोशिश करते हुए कहा
वैसे आप और जीजी को रहना है !
पसंद नहीं है तो दूसरा ढूंढ लेंगे तब तक आप मेरे घर में रह जाओ!
फ्लैट के 3 बड़े बड़े कमरे और किचन को देखने के बाद अरमान को जो विचित्र एहसास हुए उसको वह जाहिर कर के अपनी पत्नी नाज को परेशान करना नहीं चाहता था!
मन के विचारों पर कंट्रोल करते हुए तेजी से उसने निगाह से कह दिया!
फिलहाल तो निगाह हम इसी मकान में रह लेंगे..!
यस जीजी.. घर इतना भी बुरा नहीं है..! मेरे लिए सबसे फायदेमंद तो यही बात है कि जीजा और तुम दोनों मेरे घर के बिल्कुल सामने हो..!
और फिर तेरे इर्द-गिर्द ही कोई बड़ा मकान होगा तो बाद में देख लेंगे.!
ठीक है.. साफ सफाई करवा कर अपना सामान अंदर रखवा देते हैं..!
चलो अब तुम दोनों मेरे घर पर तब तक वह झाड़ू पोछा वाली भी आ जाएगी साफ सफाई उससे करवा देती हुं !
पंजाबी सलवार कुर्ते में अपने गोरे बदन को ढके हुए निगाह के मखमली श्वेत चेहरे पर फूलों सी मुस्कान छा गई!
अरमान ने आंखो से गर्भित इशारा किया!
तब नाज थोड़ी कसमसाई उसकी चेहरे पर सख्ती थी! उस नकली रोष में भी मोहब्बत की झलक रही थी!
काफी मेल था दोनों का आपस में!!
कभी कोई अनबन नहीं!
शादी के बाद साथ रहते हुए 5 साल गुजर गए थे! अब चार साल की एक प्यारी बच्ची थी!
अरमान एक अच्छा मोटर मैकेनिक था!
अपने छोटे से गांव में काम बहुत कम मिल रहा था! उस वजह से वह परेशान रहता था!
आर्थिक विडंबना की वजह से नाज को धरणी की स्वर्ग से सुंदर काफी जगहों पर घुमाने की उसकी मंशा अधूरी ही रह जाती थी!
जब नाजने अरमान की चिंताओं का जिक्र निगाह से किया तो उसने मशवरा देते हुए कहा था कि अपने मियां को लेकर तू जल्द से जल्द मेरे पास आजा! राजस्थान का पाली शहर बहुत बड़ा है!
उसका काम यहां कभी रुकेगा नहीं!
निगाह की बातों पर गौर करके
नाज ने पाली जाने के लिए अरमान को मना लिया!
और आज वो दोनो पाली मे थे!
अपनी साली के घर मे खाना हुवा तब तक ईत्मिनान से मजदूरो के पास घर की सफाई करवा के सामान भीतर रखवा दिया..!
आज दुसरे शहर मे उन्होने अपनी जिंदगी की कश्ती आगे बढाई!
छोटे छोटे तीन कमरे थे!
हर एक कमरे में खिडकिया थी जिस पर परदे लगे थे..!
मध्यस्थ खँड को बेडरुम के लिये दोनो ने चुना था!
फस्ट कमरा महेमानो के लिए मुकर्रर कर दिया और लास्ट कमरा डायनिंग होल धोषित किया..!
हदिस अपनी मा को चिपक कर लेटी थी!
अरमान अपनी साली और साढु के पास गप्पे लडा रहा था!
नाज खाना तैयार करके अरमान का वेईट कर रही थी!
काफी देर हो गई थी !
नये अंजाने शहर मे खुद को अकेली छोड कर अरमान का बाहर रहना उसके मन को नही भाया! वो काफी गुस्सा थी!
उसका गुस्सा अब ज्वाला मुखी बनकर अरमान पर टूटने वाला था!
तकरीबन साडे ग्यारा के करिब बिजली चली गई!
नाज काफी डर रही थी!
वह सूनमून होकर बेड मे लेट गई!
आंखे बंद करके उपर शॉल ओढली थी उसने!
की तब उसे कदमो की आहट सूनाई दी!
वो सो ने का ढोंग कर के पडी रही..!
अरमान ने अपने फ्लेट का गेट खोलकर भीतर एन्ट्री की अंधेरा गहेरा था..!
सामने किचन नजर आ रहा था..! फिर तीन कमरे थे!
किचन मे उसने एक परछाई देखी!
जो उसके पास होकर गुजरी.. !
अरमान को गुस्सा आया !
"बच्ची यहां गुम रही है और उसकी मा बिंदास्त होकर सो गई होगी..!
वो लडकी की परछाई अचानक उसकी आंखो से ओझल हो गई!
अरमान अंधेरे मे मोबाईल की टोर्च निकाल कर दरवाजे की और घुरता रहा!
दरवाजा बंद कर के फिर वो अपने बेडरुम मे आया!
मोबाईल टोर्च का फोक्स बेड पर डाला..!
उसकी मा से लिपट कर वो बच्ची सोई हुई थी!
अरमान के सर से काफी बोज हल्का हो गया!
पर दिमाग अभी भी गुमराह था!
किसकी परछाई थी? वह गुडिया आखिर कौन थी?
जब ईधर चूपचाप नाज को जगाकर दोनो ने खाना खाया !
उस वक्त निगाह के मकान की सिढिंया वो छोटी सी बच्ची रात का अंघेरा चीरते हुई चढ रही थी!
जिसकी परछाई किसी को नजर आने से रही!
(क्रमश:)
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