होरर स्टोरी जिन्नात की दुल्हन -7
जिन्नात की दुल्हन -7
उस दीन बडी जोरो से बारिश हो रही थी
रुकने का नाम नहीं !
बारिश में भीगना गुलशन को ठीक नही लगता था
वो चिपके से बरामदे में बैठकर मनहर उधास की गजले सून रही थी !
कि तभी उसके मोबाइल की रींग बजी!
जिया का नेईम स्क्रीन पर स्पार्क हो रहा था!
"सूब्हा ईसको क्या काम पड गया..? "
ये सोचते हुये गुलशन ने कॉल रिसीव करके रिसीवर अपने कान से सटा दिया!
हैल्लो गुलशन..!
"हा बोल जिया..!"
जल्दी मेरे घर आजा.. तूजे एक बात बतानी है..!
आन्टी को बता देना!
बहार जाना है शायद देर भी हो सकती हैं..!
उसकी आवाज हडबडाई हुई थी!
ठीक है आती हूं..!
सामने से कॉल कट गई!
गुलशन फटाफट रेडी हो गई!
श्वेत पंजाबी ड्रेस मे वो परि लग रही थी!
उसकी पूरी बोडी परफ्यूम से महक उठी थी
हाथो में वैसी ही मेंचिंग चूडीयां थी..!
गले मे महंगा डायमंड नैकलेस और कानो मे डायमंड के ही ईयरिंग्स..!
हाथो में चमचमाता हुवा छोटा सा पर्स ..!
अम्मी के पास पहूची तो उसे देखते ही अम्मीने पूछा!
"कहीं बाहर जा रही हो बेटी..? "
"हा मा..! जिया के घर जा रही हूं..!
फोनपर बहोत हडबडाई हुई उसकी आवाज थी!
पता नहीं क्या बात हुई होगी..? "
मेरी फिक्र मत करना..!
जल्द वापस लौटूंगी..!
रेनकोट पहन कर अपनी एक्टिवा पर वो निकल पडी!
रास्ते में जगह जगह पानी भर गया था!
लगभग 10 मिनट बाद गुलशन जिया के घर पहूची तो जिया अपने कमरे में परेशान सी चक्कर काट रही थी!
गुलशन को देखकर उसका चहेरा खिल गया!
जिया की दादी अम्मी वही मोजुद थी!
उन्हें सलाम करके वो जिया से मिली!
"बोल क्या बात है...!"
"आ चल बैठ..!"
उसने गुलशन को सोफे पर बिठाया!
अपने माथे से पसीना पोछती हूई बोली!
मेरे चाचा की लडकी है.. 6 साल पहले शादी हूई हैं उसकी!
संतान मे उसको पाँच साल की बच्ची है !
फिलहाल वो अपने मैके मे आई हुई हैं!
तो मैं मम्मी के साथ उसे कल मिलने पहूची!
तब चाची ने जो बाते बताई वो मेरे लिए हैरतअंगेज थी
विश्वास करना भी मुश्किल था!
पर बार बार एक जैसी घटना से चाचा चाची काफी डर गये थे!
"एसा क्या होता था..!"
गुलशन को जानने की उत्सुकता हूई!
चाय गुलशन को थमाते हुए चाचीने बात की दौर संभाली!
उसकी छोटी बच्ची रेशम दो दीन से किसी को देख डरकर चिख उठती थी!
और रोती हुई अपना चहेरा छुपा लेती थी!
उसे चिखने की वजह पूछने पर वो अपनी उँगली से जिस ओर ईशारा करती वहा!
हमे कुछ नजर आता नही था!
पर वो केहती है!
वहां श्वेत कपडो मे कोई लंबा ईन्सान खडा है!
और वो उसे धूरा है..!"
उस बच्ची के साथ हो रहे बार बार ये हादसे को कोई समझ नही पाया था कि कल एक घटना ने चाचा चाची को झकझोर कर रख दिया!
सूब्हा घंटा भर हो गया था!
बच्ची चाची के पास थी!
मगर काफी देर से उसकी 'मा' नजर नही आ रही थी!
फिर चाची को अचानक याद आया!
घंटे भर पहेले वो कपडे सूखाने छत पर गई थी!
वहाँ से वो..!
चाची गबराकर भागी..!
सीढी चडने लगी!
सीढी के उपले छौर पर नजर पडते ही!
चाची की धडकने रुक गई जैसे!
वहा चाची की लडकी बेहोश पडी हुई थी!
चाची चिखी!
चाचाजी ने संभाल कर लडकी को घर मे ले आये!
तब से उसने बोलना छोड दीया है !
किसी को भी जैसे पहचानती न हो एसे
टूकूरटूकूर देखती रहेती है वो सबको!
आज उसे जलाली बाबा की मजार पर ले जाना है!
चाचा चाची मान रहे है की घरमे कोई बूरी शक्ति का साया है!
चाचीने अपनी बात खत्म की!
गुलशन को अब भी ईस बात पर यकीन नही था की कोई बूरी शक्ति एसे परेशान कर सकती है !
"कब ले जाना है उसे दरगाह पर..?"
गुलशन पुरा माजरा जानना चाहती थी!
बस तूजे साथ लेना था मै तैयार हू..!
चलो..! "
संभल कर जाना बेटी..!
जिया की दादीअम्मीने दोनो के पीछे लपकते हुए कहा!
गुलशन की एक्टिवा पर दोनो चाची के घरकी और निकल पडी!
तब गुलशन को पता नही था की उसका ईतना सजसँवर कर निकलना उसे कितने बडे खतरे मे डालने वाला है!
(क्रमश:)
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