श्याम ढलने के बाद (गजल )


  श्याम ढलने के बाद


सन्नाटे का शहर पिघलने के बाद 
हलचल सी है दामन जलने के बाद 

 उदासी ने दम तोड़ा चौखट पे मेरी 
घुंघट मे छीपे चराग जलने के बाद

कौन आया ये बवंडर की रेत बैठ गई
चमक रहा आफताब निकलने के बाद

तेरे शहर से गुजरी होगी ठंड की लहरे
जी उठा मै तेरी खुश्बु से मिलने के बाद

आया हु राह में कुछ गुल बिखेरता हुवा
सूना है  वो आयेंगे श्याम ढलने के बाद


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